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प्रधानमंत्री जी के कुशल नेतृत्व में जनजातियों के हितों का संरक्षण

14 Nov 2021
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स्वाधीनता के लिए जनजातीय संघर्ष के महानायक भगवान बिरसा मुंडा जी की जयंती पर उन्हें शत्-शत् नमन। भगवान बिरसा मुंडा गरीबों के सच्चे भगवान थे, उन्होंने शोषित और वंचित वर्ग के लिए जीवनपर्यंत संघर्ष किया। स्वतंत्रता आंदोलन में उनका योगदान और सामाजिक सद्भावना के लिए किए गए उनके प्रयास हम सभी को सदैव प्रेरित करते हैं। बिरसा मुण्डा ने अपने सुधारवादी आंदोलनों से लोगों के लिए आदर्श प्रस्तुत किया। भगवान बिरसा मुंडा ने नैतिक आत्म-सुधार, आचरण की शुद्धता और एकेश्‍वरवाद का उपदेश दिया। ऐसे ही क्रांतिवीर नायक का स्मरण करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने आज के दिन जनजातीय गौरव दिवस मनाने का फैसला लिया है। मुझे बेहद खुशी है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने 15 नवंबर को देशभर में जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है। इसके लिए मैं माननीय प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद देता हूं।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी जनजातीय लोगों के विकास को लेकर कितने संवेदनशील हैं, इसका आंकलन इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए जनजातीय भाई-बहनों के विकास से जुड़े कई अहम् फैसले लिए। कई मुश्किलें आईं,  लेकिन राज्य ने श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में इन तमाम मुश्किलों को अवसर में बदल दिया। मोदी जी कहते हैं कि विकास की गति को तेज करने का हमारा दृढ़ संकल्प है,  ताकि गरीब से गरीब व्यक्ति भी इस विकास यात्रा का सक्रिय भागीदार बन सके। उन्हीं के नेतृत्व में राज्य ने जनजातीय समुदाय के विकास के नवीन आयामों को छुआ। गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए श्री नरेंद्र मोदी जी ने आदिवासी समुदाय के सर्वांगींण विकास के लिए वर्ष 2007 में 10 सूत्रीय वनबंधु योजना शुरू की। इसमें वनवासी बच्चों के उच्च शिक्षा, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं, पीने का शुद्द जल, सिंचाई सहित स्थानीय स्तर पर रोज़गार से जुड़ी योजनाओं का सीधा लाभ जनजातीय लोगों को मिला। संकलित डेयरी विकास योजना के तहत 1 लाख 42 हजार लोगों को दुधारू पशु दिये गये। यही नहीं राज्य की साक्षरता दर को 47.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 62.5 प्रतिशत पहुंचाया। दूध संजीवनी योजना के तहत 11 लाख छात्रों को पौष्टिक दूध दिया गया। सिकल सेल के लिए 1 करोड़ से अधिक जनजातीय लोगों की स्क्रीनिंग कर उन्हें स्वस्थ बनाया। आवासीय योजना से 6 लाख 30 हजार लोगों के घर का सपना पूरा किया।

जनजातीय लोगों के विकास का यह कार्य गुजरात तक ही सीमित नहीं रहा। प्रधानमंत्री बनने के बाद श्री नरेंद्र मोदी जी ने इस प्रक्रिया को सतत जारी रखा। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े जनजातीय समाज के विकास कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहा है। 11 करोड़ से अधिक जनजातीय समाज के हितों को संरक्षण प्रदान करने का कार्य प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने किया है। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने जनजातीय वर्ग के कल्याण के लिए वनबंधु कल्याण योजना, आदिवासी शिक्षा ऋण योजना, सावधि ऋण योजना, आदिवासी महिला सशक्तिकरण, स्वयं सहायता समूहों के लिए सूक्ष्म ऋण योजना, एकलव्य मॉडल आवासीय विकास जैसी कई योजनाएं शुरू की। जिनका सीधा लाभ जनजातीय वर्ग को मिल रहा है। प्रधानमंत्री जी का संकल्प है कि पूरे जनजातीय समाज की जल,  जंगल और जमीन पर आंच नहीं आएगी। आज जनजातीय समाज स्वयं को सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर रहा है। जनजातीय समाज जितना मजबूत होगा, देश उतना ही मजबूत बनेगा।  

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश विकास की नई करवट ले रहा है। प्रधानमंत्री जी के संकल्प सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास से ही प्रेरित हैं प्रदेश की जनजातीय विकास और कल्याण की योजनाएं। जनजातीय समाज के चहुंमुखी विकास, उत्थान और मान-सम्मान की रक्षा के लिये राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। पिछले 17 वर्षों से हमने जनजातीय समाज को बराबर के अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में कई ऐतिहासिक फैसले लिये हैं। वर्ष 2003-04 में जनजातियों के विकास के लिए महज 746.60 करोड़ रुपये का बजट था, जिसे हमने बढ़ाकर 8085.99 करोड़ तक पहुंचाया।

पं. दीनदयाल उपाध्याय जी कहते थे दरिद्र ही हमारा नारायण है और उसकी सेवा ही हमारी पूजा, उनके इस विचार से हमको प्रेरणा मिलती है। हमने जनजातीय क्षेत्रों में 24 घंटे घरेलू बिजली और 10 घंटे कृषि कार्यों के लिए बिजली देने का इंतजाम किया। यही नहीं जल जीवन मिशन के माध्यम से वनवासी अंचलों के अलावा पूरे प्रदेश में पीने का शुद्ध पानी हर घर में नल से प्रदान किया जा रहा है। पिछले 17 वर्षों में प्रदेश में 2 लाख किलोमीटर से अधिक सड़कों का जाल बिछाया गया है। प्रदेश में अनुसूचित जनजाति ऋण विमुक्ति अधिनियम 2020 लागू किया गया है जो आज से  (15 नवंबर 2021) से पूरे प्रदेश में प्रभावशील होंगा। प्रदेश सरकार ने जनजातीय समाज को उनकी उपज का सही मूल्य मिले इसके लिए समर्थन मूल्य निर्धारित किया है। तेंदूपत्ता बेचने का कार्य जनजातियों की वन समिति द्वारा किया जायेगा। तेंदूपत्ता संग्रहित करने वाली जनजातियों को मध्यप्रदेश सरकार द्वारा चरण पादुकाएं प्रदान की जा रही है।  

वनवासी अंचलों का तेजी से विस्तार करना मध्यप्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। पिछले चार वर्षों में मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना से 5 हजार 500 से अधिक जनजातीय छात्र-छात्रायें लाभान्वित हुए हैं। शैक्षणिक सत्र 2020-21 एवं 2021-22 में 27 नये एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों का निर्माण किए जाने की योजना है। एक वर्ष के भीतर बैकलॉग के पदों को भरने की योजना है। छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय का नाम राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय किया गया। वनवासी अंचल की संस्कृति आनंद की संस्कृति है। इसीलिये हमने फैसला किया है कि हर वर्ष झाबुआ उत्सव मनाया जाएगा।

ग्राम सभा को सामुदायिक संसाधनों की सुरक्षा और संरक्षण का अधिकार देने के लिए पेसा एक्ट लागू करने का ऐतिहासिक कदम उठाया है। वनाधिकार अधिनियम के अंतर्गत 34 हजार परिवारों के दावे मान्य किए गए। स्थानीय स्तर पर रोज़गार उपलब्ध हो सके इसके लिए देवारण्य योजना शुरू की गई।

जनजातीय लोगों को सिकल सेल ऐनीमिया की बीमारी से बचाव के लिए निःशुल्क इलाज की व्यवस्था की गई है। इसके लिए आज से सिकल सेल मिशन शुरू किया जाएगा। राशन आपके द्वार योजना से जनजातीय भाई-बहनों को अब राशन लेने के लिए कहीं जाना नहीं पड़ेगा। इन दोनों ही योजनाओं का शुभारंभ आज माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी करने जा रहे हैं।

मैं दोनों बाहें फैलाकर जनजातीय समाज का आह्वान करता हूं कि वे अपनी जिंदगी बदलें। विकास की दौड़ में जो पीछे और नीचे रह गए हैं उन्हें आगे लाने के लिए मैं सब कुछ करूंगा। जनजातीय समुदाय जितना सशक्त होगा, आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश निर्माण की हमारी संकल्पना उतनी ही मजबूत होगी। जनजातीय समुदाय के विकास के लिए मैं और मेरी सरकार समर्पित थे, समर्पित हैं और हमेशा समर्पित रहेंगे।    

आपका 

शिवराज        

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